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9 Interior Design Mistakes to Avoid

अरे भाई, घर सजाने में कई बार हम ऐसे ग़लतियां कर बैठते हैं जिससे लगता है जैसे कमरा जरा ज़्यादा ही ज़माना भूल गया हो। सबसे पहली बड़ी भूल होती है गलत साइज का फर्नीचर लेना, या तो कमरे में इतना छोटा सामान भर देते हैं कि चलने की जगह नहीं बचती या फिर बहुत बड़ा ले आते हैं जो पूरा रूम खांजा सा लगने लगता है। दूसरी चीज़, सारे पुराने नाना-परदादा के सामान एक साथ इकट्ठा करने से रूम पुराना और भरा-भरा दिखता है। और हाँ, कला वाली दीवार पर जब गलत साइज़ का आर्ट लगाओगे तो कुछ भी समझ नहीं आएगा! पेंट का रंग चुनने से पहले फैब्रिक चुनना चाहिए नहीं तो रंग लड़ सकते हैं। अगर आप चाहते हो सब कुछ सही, तो DISQAS.com जैसे प्लेटफॉर्म पर एक्सपर्ट्स से वीडियो कॉल कर लेना; वही आपको बताएंगे कहाँ ग़लत किया और कैसे सुधारना! ऑनलाइन सलाह मांगो और घर को ऐसा बनाओ कि लोग पूछें: “इतनी सुंदर डिज़ाइन कहाँ से ली?”

Table of Contents

  1. गलत आकार और माप से बचें, वरना कमरा लगेगा या तो चिड़िया घर या फिर कबाड़खाना
  2. सभी पारंपरिक सामान एक साथ रखने से बचें, वरना घर दिखेगा पुराना और भारी
  3. कला के सही आकार और शैली का चुनाव करें, छोटे चित्रों को आंखों से दूर मत रखें
  4. दीवारों का रंग चुनने से पहले फर्नीचर और फैब्रिक्स पर ध्यान दें, रंगों के झगड़े से बचें
  5. न्यूट्रल रंगों को बोरिंग न बनाएं, गर्माहट और रंगीन एक्सेसरीज़ से जान डालें
  6. ट्रेंड्स की नकल मत करें, अपनी खुद की स्टाइल में थोड़ी मस्ती और पर्सनैलिटी डालें
  7. हर कमरे में एक फोकस पॉइंट बनाएं, वरना नजरें इधर-उधर भटकती रहेंगी
  8. लाइटिंग को तीन स्तरों में बांटें: एम्बिएंट, टास्क और एक्सेंट, अंधेरा छोड़ो, रोशनी बढ़ाओ
  9. फर्नीचर के बीच में जगह छोड़ें, ताकि कमरा लगे खुला और सांस ले सके
  10. DISQAS.com से कनेक्ट होकर वीडियो कॉल पर एक्सपर्ट से सलाह लें, बिना घर छोड़े डिज़ाइन सुधारें
  11. DISQAS.com पर प्रोफाइल देखें, रेटिंग चेक करें और अपने लिए सही इंटीरियर डिज़ाइनर या आर्किटेक्ट चुनें
  12. DISQAS.com पर अपॉइंटमेंट आसानी से बुक करें और वीडियो कॉल में अपने सवाल पूछकर फटाफट समाधान पाएं

1. गलत आकार और माप से बचें, वरना कमरा लगेगा या तो चिड़िया घर या फिर कबाड़खाना

wrong room dimensions interior designकमरे के लिए फर्नीचर और सजावट का साइज सोच-समझकर चुनना बहुत जरूरी है, वरना आपके कमरे का हाल ऐसा हो जाएगा जैसे चिड़िया घर हो या कबाड़खाना! अगर बहुत छोटे फर्नीचर रखोगे तो जगह तो बचेगी लेकिन लगेगा जैसे सारे पक्षी आकर बैठ गए हों, हर चीज़ छोटी-छोटी और जगह खाली-खाली। वहीं अगर भारी-भरकम बड़े फर्नीचर रख दोगे तो कमरा घुटन भरा और कबाड़खाने जैसा दिखेगा, जहां चलना तक मुश्किल हो। इसलिए मिश्रित आकारों का इस्तेमाल करें, जैसे कुछ छोटे, कुछ मध्यम और एक बड़ा स्टेटमेंट पीस जो पूरे कमरे को बांधे रखे। माप लेते वक्त ध्यान रखें कि फर्नीचर और दीवार के बीच पर्याप्त जगह हो, ताकि कुर्सियां टकराएं नहीं और आराम से चल फिर सकें। ऑनलाइन खरीदारी करते समय साइज की जांच करना ना भूलें, क्योंकि माप के हिसाब से सामान खरीदना ही असली स्मार्टनेस है। कमरा छोटा हो या बड़ा, फर्नीचर की ऊंचाई और चौड़ाई का संतुलन बनाए रखना जरूरी है, वरना न तो आराम मिलेगा और न ही नजरों को सुकून। याद रखें, सही आकार का फर्नीचर ही आपके घर को चिड़िया घर या कबाड़खाना बनने से बचा सकता है!

  • कमरे के लिए फर्नीचर और सजावट का साइज सोच-समझकर चुनें, बहुत बड़े या बहुत छोटे आइटम्स से बचें
  • कमरे में छोटे फर्नीचर से जगह तो बचती है, लेकिन ऐसा लगेगा जैसे चिड़िया घर हो गया हो
  • बड़े भारी फर्नीचर से कमरा घुटन भरा और कबाड़खाना जैसा दिख सकता है
  • मिश्रित आकारों का इस्तेमाल करें, ताकि नीरसता न आए और नजर को आराम मिले
  • कमरे में एक बड़ा स्टेटमेंट पीस जरूर रखें, जो पूरी जगह को बांध सके
  • माप लेते वक्त फर्नीचर और कमरे की दीवारों की दूरी का ध्यान रखें
  • कमरे में चलने-फिरने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ें, ताकि कुर्सियां टकराएं नहीं
  • माप के हिसाब से सामान खरीदें, ऑनलाइन खरीददारी में माप की जांच ज़रूर करें
  • कमरे के आकार के हिसाब से फर्नीचर की ऊंचाई और चौड़ाई का संतुलन बनाए रखें
  • आइटम्स के आकार और कमरे के आकार के बीच सामंजस्य गड़बड़ाने से बचें

2. सभी पारंपरिक सामान एक साथ रखने से बचें, वरना घर दिखेगा पुराना और भारी

अगर आप सोच रहे हैं कि सारे पुराने पारंपरिक सामानों को एक ही जगह जमा कर देंगे तो घर क्या, पूरा म्यूजियम लग जाएगा! सच कहूं तो, जब सारे पुराने आइटम्स एक साथ रखे जाते हैं, तो कमरा ऐसा बोझिल और भारी लगने लगता है कि लगता है जैसे फर्नीचर खुद कहीं भागना चाहता हो। इसलिए, इन खजानों को अलग-अलग छोटे-छोटे समूहों में सजाइए ताकि हर चीज़ की अपनी शोभा बनी रहे और कमरा हल्का-फुल्का दिखे। साथ ही, थोड़े नए और रंगीन एक्सेसरीज़ जैसे रंगीन कुशन या मॉडर्न लाइटिंग मिलाकर एकदम ताज़गी भरा लुक लाएं। याद रखें, भारी पारंपरिक सामानों को धूप वाले कोनों में रखना मतलब उन्हें और भी भारी बना देना है, जैसे कि गर्मी में तौलिया पहनना। पुरानी चीज़ों को साफ-सुथरा और रिपेयर करके रखें, वरना वे कबाड़ लगने लगेंगी और घर की शोभा कम हो जाएगी। दीवारों पर भी बस पारंपरिक सामानों की भरमार करने से बचें, क्योंकि इससे कमरा छोटा और ग़मगीन लगेगा। हल्के रंग और आधुनिक वॉल पेंट के साथ इन पुराने खजानों को मिलाएं, ताकि आपका घर एकदम नया और ज़िंदादिल लगे। और हां, स्टोरेज और शेल्फ का सही इस्तेमाल करें ताकि सब कुछ व्यवस्थित रहे, वरना आपकी पारंपरिक चीज़ें खुद ही बिखर जाएंगी, आपकी जगह नहीं!

3. कला के सही आकार और शैली का चुनाव करें, छोटे चित्रों को आंखों से दूर मत रखें

जब बात आती है कला के चुनाव की, तो बड़ा सोचिए, लेकिन सही माप के साथ! बड़े चित्र कमरे की दीवार पर ऐसे खड़े होते हैं जैसे वो कह रहे हों, “देखो मुझे!” जबकि छोटे चित्र अक्सर एक कोने में ऐसे खो जाते हैं जैसे वो शरमा रहे हों। और हां, छोटे चित्रों को आंखों की सीधी रेखा के पास ही लगाएं, ताकि उन्हें देखकर कोई ये न सोचे कि ये तो छुपे हुए हैं। कला की शैली भी ज़रूरी है – अगर आपका कमरा मॉडर्न है और आप वहां पुरानी दादी की पेंटिंग लगा देंगे, तो समझिए, ‘स्टाइल का टक्कर’ हो गया! इसलिए कला को कमरे की बाकी डिजाइन से मेल खाते हुए चुनिए। छोटे चित्रों को समूह में लगाइए, जैसे वो आपस में बातें कर रहे हों, और एक बड़ी फ्रेम बनाकर भी उन्हें जोड़ सकते हैं, इससे वो एक कहानी कहेंगे। फ्रेम का चुनाव भी सोच-समझ कर करें, रंग और मूड के हिसाब से, वरना फ्रेम ऐसा लगेगा जैसे वो किसी और पार्टी से आ गया हो। और कला को दीवार पर न तो बहुत ऊंचा लगाएं कि आपको गर्दन मोड़नी पड़े, न ही बहुत नीचे कि कला खुद आपसे झुक कर मिले। कमरे के रंगों से मेल खाते चित्र चुनना भी समझदारी है, ताकि सब कुछ एक-दूसरे के साथ झगड़ा न करें। अंत में, अपनी कला को लाइटिंग से हाइलाइट करें, ताकि वो कमरे में शान से चमक उठें और लोग सोचें, “वाह, यहां तो कला ने भी ठिकाना बना लिया!”

4. दीवारों का रंग चुनने से पहले फर्नीचर और फैब्रिक्स पर ध्यान दें, रंगों के झगड़े से बचें

choosing wall colors with furniture and fabricsदेखिए, दीवारों का रंग चुनना ऐसा नहीं कि बस ब्रश उठाओ और रंग पोत दो। पहले तो अपने सोफे, पर्दे और गलीचे जैसे फैब्रिक्स का रंग देखो। अगर दीवार का रंग फर्नीचर से टकराएगा, तो आपकी आंखें कहेंगी, “भाई, थोड़ा आराम कराओ!”। हमेशा ध्यान रखें कि एक ही रंग के अलग-अलग शेड्स का इस्तेमाल करें ताकि रंगों में एक अजीब सा झगड़ा न हो, बल्कि एक प्यारा सा सामंजस्य बना रहे। गहरे रंग की दीवार के सामने हल्का फर्नीचर रखना चाहिए, वरना लगता है जैसे दीवार ने फर्नीचर को निगल ही लिया हो। और हां, प्राकृतिक रोशनी के हिसाब से रंग चुनना मत भूलना, क्योंकि सूरज की किरणें रंगों के साथ ऐसा खेल करती हैं कि आपको बाद में पछताना पड़ सकता है। चमकीले रंगों को पूरी दीवार पर लगाने की बजाय, एक कोना या एक दीवार पर सीमित करें, वरना लगेगा जैसे डिस्को पार्टी चल रही हो। रंगों का कंट्रास्ट होना चाहिए, लेकिन इतना भी नहीं कि आप खुद को रंगों के बीच फंसा हुआ महसूस करें। आखिरी सलाह, रंग का सैंपल पहले टेस्ट कर लें, ताकि बाद में “अरे ये तो वैसा नहीं था” वाली कहानी न बनानी पड़े।

5. न्यूट्रल रंगों को बोरिंग न बनाएं, गर्माहट और रंगीन एक्सेसरीज़ से जान डालें

न्यूट्रल रंग जैसे सफेद, बेज या ग्रे को देखकर अगर आपकी आंखें सो जाने लगें तो समझ जाइए, कमरा बोरिंग हो चुका है! ऐसे में रंगीन कुशन या पर्दे डालिए, जैसे कोई पार्टी में रंगीन टोपी पहन लेता है, वैसे ही कमरे को नया जोश मिलेगा। ऊनी कंबल या रेशमी कुशन से टेक्सचर जोड़िए, ताकि कमरे में सिर्फ रंग नहीं बल्कि मस्ती भी आए। पौधे और फूल वैसे ही काम करते हैं जैसे रंगीन फ्रूट केक में चेरी, वो इंस्टेंट ब्राइटनेस! दीवारों पर रंगीन कला या फोटो फ्रेम लगाइए, वरना न्यूट्रल दीवारें खुद को भुला देंगी। गोल्ड और ब्रोंज़ के छोटे आइटम्स रखें, जो दिखते हैं जैसे राजा के खजाने से निकले हों। लाइटिंग में पीली या नारंगी रोशनी डालें, ताकि ठंडी न्यूट्रल टोन में भी गर्माहट झलकती रहे। रंगीन कालीन या रग्स फर्श पर बिछाइए, जो न्यूट्रल रंग की नींद तोड़कर मस्ती कराए। वास, लैंप या मूर्तियों में छोटे-छोटे रंगीन मिश्रण रखें ताकि हर कोना बोले, “मैं भी हूँ यहाँ!” सफेद या बेज में पैटर्न वाले फर्नीचर या कर्टन चुनिए, ताकि न्यूट्रल रंग भी अपनी कहानी सुनाए। बस, इतना करें कि आपका न्यूट्रल कमरा बोरिंग नहीं, बल्कि स्टाइलिश और दिलचस्प लगे, वरना तो ये रंग भी सो जाएंगे!

6. ट्रेंड्स की नकल मत करें, अपनी खुद की स्टाइल में थोड़ी मस्ती और पर्सनैलिटी डालें

भाई, ट्रेंड्स का पीछा करते-करते घर ऐसा मत बना देना जैसे फैशन शो का रनवे हो! ट्रेंड्स जल्दी बदल जाते हैं, कल जो हॉट था आज फ्लॉप, तो क्यों न अपनी पसंद और पर्सनैलिटी को घर में चमकाएं? अपने मनपसंद रंग, यादगार चीजें और कुछ मजेदार छोटे आइटम रखो, जो तुम्हारी कहानी बयां करें। ट्रेंड को अपनाने में भी अपनी मर्जी का ट्विस्ट डालो, जैसे रंगों में एक्सपेरिमेंट करो या फर्नीचर को थोड़ा हटके चुनो। बस इसलिए कोई आइटम मत खरीदो कि वो ट्रेंड में है, सोचो क्या वो तुम्हारे घर के लिए सही है या नहीं। पुरानी और नई चीजों को मिलाकर एकदम यूनिक लुक बनाओ, जैसे दादी की वो पुरानी घड़ी और नया मॉडर्न लैंप साथ-साथ। मजेदार एक्सेसरीज़ और अनोखे लाइटिंग ऑप्शन्स से घर को जिंदगी दो, ताकि हर कोई कहे “वाह, ये तो दिलचस्प है!” और हाँ, बजट का ध्यान रखना वरना ट्रेंड के चक्कर में पैसे का जंजाल बन जाएगा। क्लासिक और टाइमलेस चीजों को भी साथ में रखो, ताकि घर हमेशा स्टाइल में रहे, भले ट्रेंड चेंज होते रहें!

7. हर कमरे में एक फोकस पॉइंट बनाएं, वरना नजरें इधर-उधर भटकती रहेंगी

room with a clear focal pointसोचिए अगर आपके कमरे में कोई ऐसा सितारा नहीं जो सबका ध्यान अपनी ओर खींचे, तो आपकी नजरें उस कमरे में घूम-घूम कर थक जाएंगी! इसलिए हर कमरे में एक फोकस पॉइंट ज़रूरी है, जैसे बड़ा रंगीन सोफा या दीवार पर टंगी कोई जबरदस्त पेंटिंग। इसे कमरे के बीच में रखें ताकि जैसे ही कोई अंदर आए, उसकी नजर तुरंत वहीं अटक जाए। फर्नीचर और बाकी सजावट को इस तरह सजाएं कि वे भी उस फोकस पॉइंट की तरफ इशारा करें, जैसे सब मिलकर कह रहे हों, “भाई, यहीं देखो!” बाकी का सामान थोड़ा साधारण रखें, वरना ध्यान बंट जाता है और कमरा लगेगा जैसे मेला। अच्छी लाइटिंग भी कमाल करती है: स्पॉटलाइट या लैम्प से फोकस पॉइंट को चमकाएं ताकि वो सच में चमक उठे। अगर फोकस पॉइंट दीवार है, तो उस पर आकर्षक वॉलपेपर या बड़ी पेंटिंग लगाएं, ताकि कोई भी उस पर नजरें टिकाए बिना न रह सके। और हां, बार-बार फोकस पॉइंट बदलने की कोशिश मत करें, इससे कमरा ऐसा लगेगा जैसे हर दिन नया ड्रामा चल रहा हो। कमरे की जगह और काम के हिसाब से फोकस पॉइंट चुनें, जैसे लिविंग रूम में टीवी या कोई आर्ट पीस। याद रखें, फोकस पॉइंट के आसपास थोड़ी खुली जगह रखें ताकि वह और भी निखरे, और बाकी छोटी-मोटी सजावट भी रखें, पर संतुलन बनाए रखें, नहीं तो कमरा लगेगा जैसे सजावट का सैलून खुल गया हो!

8. लाइटिंग को तीन स्तरों में बांटें: एम्बिएंट, टास्क और एक्सेंट, अंधेरा छोड़ो, रोशनी बढ़ाओ

अगर आप सोच रहे हैं कि लाइटिंग सिर्फ एक बल्ब जलाने से हो जाएगी, तो समझिए आप घर नहीं, अंधेरे में छिपे रहस्य की तलाश कर रहे हैं! घर की लाइटिंग को तीन स्तरों में बांटना बिल्कुल ज़रूरी है: एम्बिएंट (मुख्य रोशनी), टास्क (काम की लाइट) और एक्सेंट (खास चीज़ों को दिखाने वाली लाइट)। एम्बिएंट लाइटिंग से पूरा कमरा रोशन करें, जैसे छत की लाइट या बड़े फिक्स्चर, ताकि अंधेरा दूर भाग जाए और आपका घर नीरस न लगे। टास्क लाइटिंग काम वाली जगहों पर लगाएं, जैसे पढ़ाई की मेज़, किचन या ऑफिस टेबल, जिससे काम करते समय आपकी आंखें तरोताजा रहें। और हाँ, एक्सेंट लाइटिंग से अपने पसंदीदा पेंटिंग, शेल्फ या सुंदर पौधों को हाईलाइट करें, ताकि हर कोई कहे, “वाह! ये तो मज़ेदार है!” अंधेरा कम करें क्योंकि अंधेरे में घर डरावना और नीरस लग सकता है, और कोई भी भूत-प्रेत की कहानी सुनना नहीं चाहता। लाइटिंग के रंगों पर ध्यान दें, वॉर्म लाइट आरामदेह माहौल बनाती है जबकि कूल लाइट ताजगी लाती है, जैसे गर्म चाय या ठंडी लेमोनेड की तरह। डिमर स्विच का इस्तेमाल करें, ताकि आप रोशनी की तीव्रता को अपनी मूड के हिसाब से कम-ज्यादा कर सकें। लैंप और स्टैंड लाइट्स से सजावट में चार चांद लगाएं, ये छोटे-छोटे हीरो होते हैं जो कमरों को स्टाइलिश बनाते हैं। प्राकृतिक रोशनी का भी पूरा फायदा उठाएं, रोशन पर्दे लगाएं ताकि दिन की रोशनी आपके घर में झूम-झूम के आए। और याद रखें, कमरे के कोनों में भी लाइटिंग ज़रूर लगाएं, क्योंकि कोई भी कोना ऐसा न हो जहाँ अंधेरा अपना कब्जा जमा सके। आखिरकार, सही लाइटिंग से ही आपका कमरा न सिर्फ रोशन होगा, बल्कि उसका मूड भी बदल जाएगा – और कौन नहीं चाहता कि उसका घर चमकता-दमकता और जीवन से भरा हो?

9. फर्नीचर के बीच में जगह छोड़ें, ताकि कमरा लगे खुला और सांस ले सके

भाई, फर्नीचर को ऐसे न लगाओ जैसे सब्जी मंडी में दुकानें टंग गई हों! कम से कम 30-45 सेंटीमीटर की दूरी रखो ताकि तुम आराम से कमरे में घूम-फिर सको, वरना बैठते-बैठते ही फर्नीचर से टकरा जाओगे और कमरा लगेगा जैसे ट्रैफिक जाम। मेन रास्ते को खुला रखना बहुत जरूरी है, ताकि जब भी तुम्हारी मम्मी या कोई मेहमान आए, उन्हें झटका न लगे। दीवार से थोड़ा फर्नीचर दूर रखना भी ज़रूरी है, इससे हवा और रोशनी की फुल फ्लो होती है, वरना कमरा लगेगा जैसे अंधेरे की गुफा। ज्यादा फर्नीचर लगाने से बचो, कम में ज्यादा आराम मिलता है, और कमरे की हवा भी ताजी रहती है। छोटे कमरे में मल्टीफंक्शनल फर्नीचर चुनो, जो जगह बचाए और स्टाइल भी दे। फर्नीचर को एक लाइन में कड़क न लगाओ, थोड़ा-थोड़ा जगह छोड़कर सजाओ, ताकि कमरा बोले ‘मैं खुला और आरामदायक हूँ’। खिड़कियों और दरवाज़ों के पास फर्नीचर लगाने से बचो, वरना कमरा घुटन में आ जाएगा। तो अगली बार जब फर्नीचर लगाओ, तो इसे सांस लेने दो, नहीं तो कमरा झल्लाएगा और तुम भी!

फर्नीचर के बीच की दूरी फ़ायदे क्या ध्यान रखें
30-45 सेंटीमीटर चलने-फिरने में आसानी बहुत घनी जगह से बचें
मुख्य रास्ता खुला रखें टक्कर से बचाव रास्ते में फर्नीचर न रखें
फर्नीचर दीवार से दूरी पर रखें कमरे में हवा और रोशनी का प्रवाह बढ़े दीवार से बहुत चिपकाएं नहीं
कम फर्नीचर ज्यादा आराम कम भीड़-भाड़ कमरे को भारी मत बनाओ
मल्टीफंक्शनल फर्नीचर चुनें छोटे कमरे में जगह बचाएं चारों तरफ से उपयोगी
फर्नीचर लाइन में न रखें जगह थोड़ी-थोड़ी छोड़ें स्क्रीन, टेबल आदि को संयोजित करें
फर्नीचर और कमरे का संतुलन कमरा बड़ा दिखे माप लेते समय सतर्क रहें
खिड़कियों और दरवाज़ों के पास फर्नीचर न रखें कमरा खुला और साफ दिखे सामान व्यवस्थित रखें
खुली जगह रखें कमरा साफ-सुथरा और बड़ा लगे भीड़-भाड़ से बचाएं
सहज चलने-फिरने की जगह बनाएं आरामदायक माहौल टकराव और झगड़े से बचें

10. DISQAS.com से कनेक्ट होकर वीडियो कॉल पर एक्सपर्ट से सलाह लें, बिना घर छोड़े डिज़ाइन सुधारें

आज के जमाने में घर की सजावट में गलती करना मतलब खुद को ही पजल में उलझा लेना है। लेकिन चिंता मत करें, DISQAS.com है न! ये एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहां आप बिना घर छोड़े, अपने सोफे पर आराम से बैठे-बैठे वीडियो कॉल के जरिए आर्किटेक्ट, इंटीरियर डिजाइनर और कंस्ट्रक्शन सलाहकार से सलाह ले सकते हैं। सोचिए, अपने कमरे की तस्वीरें और माप शेयर करें और एक्सपर्ट आपको कस्टमाइज्ड सुझाव दें, जैसे आपके कमरे की हर दीवार खुद बोल उठे! यहां आप विशेषज्ञों के प्रोफाइल देख सकते हैं, उनकी रेटिंग और फीस भी चेक कर सकते हैं, जिससे सही इंसान चुनना आसान हो जाता है। अब बिना समय और पैसे की बर्बादी के तुरंत प्रोफेशनल सलाह मिलती है, जैसे कोई डिज़ाइन वाला सुपरहीरो आपके घर आ गया हो। अपनी पसंद और बजट के हिसाब से छोटे-मोटे बदलाव या बड़े रेनोवेशन की योजना बनाएं, ताकि आपका घर न सिर्फ सुंदर दिखे बल्कि काम करने में भी आरामदायक हो। बस DISQAS.com पर अकाउंट बनाएं, अपनी जरूरत के अनुसार सेशन चुनें, और वीडियो कॉल से एक्सपर्ट से बात कर अपने सपनों का घर सजाएं। आखिरकार, डिज़ाइन में गलती करने की बजाय, आज ही डिजिटल सलाह लेकर घर की खूबसूरती और कार्यक्षमता दोनों बढ़ाएं!

11. DISQAS.com पर प्रोफाइल देखें, रेटिंग चेक करें और अपने लिए सही इंटीरियर डिज़ाइनर या आर्किटेक्ट चुनें

घर सजाने की सोच रहे हैं तो DISQAS.com पर जाकर प्रोफाइल देखना बिल्कुल वैसा ही है जैसे शादी के लिए रिश्ता देखना, पर यहाँ सिर्फ रेटिंग और अनुभव के आधार पर सही जोड़ी (डिज़ाइनर) चुननी होती है! सबसे पहले एक्सपर्ट्स के प्रोफाइल ध्यान से पढ़िए, उनकी स्पेशलिटी और काम का अनुभव जानिए। रेटिंग पर भी नजर डालिए, क्योंकि पॉइंट कम होने पर समझ जाइए कि ये डिज़ाइनर आपको आपके घर की जगह म्यूज़ियम बना सकता है! यूजर्स के रिव्यू पढ़ना बिलकुल जरूरी है, ताकि पता चले कि एक्सपर्ट ने अपने क्लाइंट्स को खुश किया या सिर्फ फोटोशॉप में कमाल दिखाया। बजट भी ध्यान में रखिए, क्योंकि महंगा हमेशा अच्छा नहीं होता, और सस्ता भी हमेशा गड़बड़ नहीं। पोर्टफोलियो देखकर समझिए उनकी स्टाइल आपकी पसंद के हिसाब से है या नहीं, जैसे कि आपको मॉडर्न चाहिए या फिर क्लासिक। प्रोफाइल में वीडियो या फोटो हो तो उसे भी ज़रूर देखें, ये आपको एक्सपर्ट की प्रोफेशनलिज्म का अंदाजा देता है, वरना कौन जाने ये तो बस सेल्फी लेने वाला हो। सवाल पहले से तैयार रखें ताकि डिस्कशन में आप शानदार इंटरव्यूअर बन सकें और सही एक्सपर्ट का चुनाव कर सकें। कंसल्टेशन फीस और टाइम स्लॉट भी चेक करें, ताकि बुकिंग करते वक्त ‘अरे यार, ये तो मेरे बजट से बाहर है’ वाली स्थिति न आए। अगर मन में शक हो तो दो-तीन प्रोफाइल को चुनकर तुलना करें, क्योंकि घर सजाना कोई आम बात नहीं, ये तो लाइफ का बड़ा प्रोजेक्ट है!

12. DISQAS.com पर अपॉइंटमेंट आसानी से बुक करें और वीडियो कॉल में अपने सवाल पूछकर फटाफट समाधान पाएं

सोचिए, जब आपके घर की दीवारें आपकी अजीबोगरीब डिज़ाइन सुनने को तैयार हों, तो आप DISQAS.com पर जाकर सीधे एक प्रोफेशनल इंटीरियर डिज़ाइनर से वीडियो कॉल पर बात कर सकते हैं। बस वेबसाइट पर साइन अप करें, फिर अपने प्रोजेक्ट से जुड़े कीवर्ड डालकर एक्सपर्ट्स की लिस्ट देखें। मज़े की बात ये है कि आप अपनी पसंद के डिज़ाइनर को चुनकर उनके उपलब्ध टाइम स्लॉट में अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। अपॉइंटमेंट बुक करते वक्त अपने सवाल और प्रोजेक्ट की डिटेल्स नोट कर लें, ताकि वीडियो कॉल में आप टॉपिक से भटकें नहीं और सीधे मुद्दे पर आ जाएं। वीडियो कॉल के दौरान अपने डिजाइन के झमेले, रंगों के कॉम्बिनेशन, फर्नीचर की जगह जैसी बातें खुलकर एक्सपर्ट से शेयर करें। अगर कोई बात समझ में न आए तो तुरंत पूछ डालें, क्योंकि ऑनलाइन इंटरैक्शन में चुप रहना महंगा पड़ सकता है! पेमेंट भी पूरी तरह से सुरक्षित है, और रसीद आपके पास रहेगी ताकि बाद में कोई बहाना न चले। वीडियो कॉल के बाद एक्सपर्ट की सलाह के हिसाब से अगली स्टेप्स प्लान करें, और जरूरत पड़ी तो फॉलो-अप कॉल भी बुक कर लें ताकि आपका प्रोजेक्ट बिना किसी रुकावट के पूरा हो जाए। तो घर बैठे-बैठे डिज़ाइन की दुनिया में महारथ हासिल करने के लिए DISQAS.com से बेहतर दोस्त कोई नहीं!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

1. इंटीरियर डिजाइन में आखिरी पलों की जलदबाजी क्यों नुकसानदेह होती है?

भाई, जलदबाजी में जो भी सोचो, वो आधा सच रहता है। आखिरी समय पकड़ कैसे सही फर्नीचर या रंग मिला? ऐसा न हो कि घड़ी की टिक-टिक में हाथी के कद का лам्प आ जाए और घर होटल जैसा लगे। इसलिए थोड़ा धैर्य, वरना मज़ाकिया डिजाइन के साथ मज़े में पड़ जाओगे!

2. क्या हर कमरा एक जैसा कलर स्कीम चाहता है या थोड़ी आज़ादी भी चाहिए?

बिलकुल, हर कमरा एक जैसा रंगों से सजाना ऐसा होगा जैसे हर पार्टी में वही एक गाना बार-बार बजता रहे। थोड़ा क्रिएटिव हो जाओ दोस्त! रूम को अपनी पहचान दो, वरना तुम्हारा घर देखने में म्यूजियम की तरह फनी लग सकता है। रंगों से खेलो, पर समझदारी से!

3. फर्नीचर का साइज कैसे तय करें ताकि कमरा न बोरिंग लगे, न तंग?

भाई, यहाँ ना तो छोटा क्यूंकि लगेगा जैसे चिड़िया का घोंसला, ना बड़ा कि कमरे से बाहर निकल आए! संतुलन रखना सीखो जैसे अपनी लाइफ में। सही प्रो आउटफिट की तरह, सही साइज वाला फर्नीचर ही कमरा और दिल दोनों को खुश कर सकता है। बेटा, ज्यादा बड़ा या ज्यादा छोटा काम नहीं करेगा!

4. क्या ज्यादा सजावट से घर नाटकीय नहीं लगने लगता?

हाहाहा, बिल्कुल लग सकता है! ज़्यादा सजावट मतलब घर नहीं, रंगीन मेले जैसा लग सकता है जहां हर चीज़ चहक रही हो। थोड़ी कमीशन में ही खूबसूरती है। जितना ज़रूर हो, बस उतना ही, ज्यादा शोहरत नहीं। वरना तुम्हारा स्टाइल डिजाइन नहीं, मज़ाक लग सकता है!

5. प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) का दिमागी मामला क्यों है घर की जान?

लाइटिंग का खेल बड़ा ही दिलचस्प है, सही लाइट से कमरा ऐसा चमकेगा कि लगेगा दो दिन की पार्टी चल रही हो। गलत लाइट? भाई, कमरा ऐसा दिखेगा जैसे थियेटर का हॉरर शो! तो लाइटिंग के साथ धोखा मत खाना, सही जगाह पर सही लाइट लगाओ, वरना घर का मूड भूगोल की तरह बदल जाएगा।

TL;DR घर सजाने में गलत माप से लेकर फर्नीचर के बीच जगह न छोड़ने तक, ये नौ डिजाइन की गलतियां आपके कमरे को बना सकती हैं ‘चिड़िया घर’ या ‘कबाड़खाना’। पारंपरिक सामान एक साथ ठूंसने से बचें, कला को सही आकार में लगाएं, और दीवार के रंग चुनने से पहले फर्नीचर देखें। न्यूट्रल रंगों को बोरिंग मत बनाएं, ट्रेंड्स की नकल नहीं, अपनी स्टाइल में मस्ती डालें। हर कमरे में फोकस पॉइंट और तीन स्तरों की लाइटिंग जरूर रखें, ताकि घर चमके और नजर भी न भटके। अब डिज़ाइन सलाह के लिए DISQAS.com से वीडियो कॉल पर एक्सपर्ट से बात करें, बिना घर छोड़े, फटाफट समाधान पाएं। ख़ुला कमरा और बढ़िया डिजाइन बस एक क्लिक दूर है!